№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Yoginis and Krishna

Shanta

बादल भिगो गए रातोंरात

Badal Bhigo Gaye Raatonraat

Nagarjun
1 min read 5 versesमानसूनmonsoonपहाड़

5 verses · ~1 min

मानसून उतरा है जहरी खाल की पहाड़ियों पर

बादल भिगो गए रातोंरात सलेटी छतों के कच्चे-पक्के घरों को प्रमुदित हैं गिरिजन

सोंधी भाप छोड़ रहे हैं सीढ़ियों की ज्यामितिक आकॄतियों में फैले हुए खेत दूर-दूर... दूर-दूर दीख रहे इधर-उधर डाँड़े के दोनों ओर दावानल-दग्ध वनांचल कहीं-कहीं डाल रहीं व्यवधान चीड़ों कि झुलसी पत्तियाँ मौसम का पहला वरदान इन तक भी पहुँचा है

जहरी खाल पर उतरा है मानसून भिगो गया है रातोंरात सबको इनको उनको हमको आपको मौसम का पहला वरदान पहुँचा है सभी तक...

1984 में रचित

इति

Nagarjun

The Poet

नागार्जुन

Nagarjun

Yoginis and Krishna

Paired Painting

Yoginis and Krishna

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Badal Bhigo Gaye Raatonraat carries.