№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Surya

Adbhuta

ये प्रकाश ने फैलाये हैं

Ye Prakash Ne Phailaye Hain

Makhanlal Chaturvedi
2 min read 6 versesप्रकाशlightअन्धकार

6 verses · ~2 min

ये प्रकाश ने फैलाये हैं पैर, देख कर ख़ाली में अन्धकार का अमित कोष भर आया फैली व्याली में

ख़ाली में उनका निवास है, हँसते हैं, मुसकाता हूँ मैं ख़ाली में कितने खुलते हो, आँखें भर-भर लाता हूँ मैं इतने निकट दीख पड़ते हो वन्दन के, बह जाता हूँ मैं संध्या को समझाता हूँ मैं, ऊषा में अकुलाता हूँ मैं चमकीले अंगूर भर दिये दूर गगन की थाली में ये प्रकाश ने फैलाये हैं पैर, देख कर ख़ाली में।।

पत्र-पत्र पर, पुष्प-पुष्प पर कैसे राज रहे हो तुम नदियों की बहती धारा पर स्थिर कि विराज रहे हो तुम चिड़ियाँ फुदकीं, कलियाँ चटकीं, फूल झरे हैं, हारे हैं पर शाखाओं के आँचल भी भरे-भरे हैं, प्यारे हैं।

तुम कहते हो यह मैंने शृंगार किया दीवाली में।। ये प्रकाश ने फैलाये हैं पैर देख कर ख़ाली में।।

चहल-पहल हलचल का बल फल रहा अनोखी साँसों में तुम कैसे निज को गढ़ते हो भोलेपन की आसों में उनकी छवि, मेरे रवि जैसी, ऊग उठी विश्वासों में कितने प्रलय फेरियाँ देते, उनके नित्य विलासों में

यह उगन, यह खिलन धन्य है माली! उस पामाली में।। ये प्रकाश ने फैलाये हैं पैर, देख कर ख़ाली में।।

इति

Makhanlal Chaturvedi

The Poet

माखनलाल चतुर्वेदी

Makhanlal Chaturvedi

Surya

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Surya

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ye Prakash Ne Phailaye Hain carries.