
कुंज कुटीरे यमुना तीरे
Kunj Kutire Yamuna Teere
Makhanlal Chaturvedi
15 verses · ~32 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Varsha Ne Aaj Vidai Li
Makhanlal Chaturvedi10 verses · ~2 min
वर्षा ने आज विदाई ली जाड़े ने कुछ अंगड़ाई ली प्रकृति ने पावस बूँदो से रक्षण की नव भरपाई ली।
सूरज की किरणों के पथ से काले काले आवरण हटे डूबे टीले महकन उठ्ठी दिन की रातों के चरण हटे।
पहले उदार थी गगन वृष्टि अब तो उदार हो उठे खेत यह ऊग ऊग आई बहार वह लहराने लग गई रेत।
ऊपर से नीचे गिरने के दिन रात गए छवियाँ छायीं नीचे से ऊपर उठने की हरियाली पुन: लौट आई।
अब पुन: बाँसुरी बजा उठे ब्रज के यमुना वाले कछार धुल गए किनारे नदियों के धुल गए गगन में घन अपार।
अब सहज हो गए गति के वृत जाना नदियों के आर पार अब खेतों के घर अन्नों की बंदनवारें हैं द्वार द्वार।
नालों नदियों सागरो सरों ने नभ से नीलांबर पाए खेतों की मिटी कालिमा उठ वे हरे हरे सब हो आए।
मलयानिल खेल रही छवि से पंखिनियों ने कल गान किए कलियाँ उठ आईं वृन्तों पर फूलों को नव मेहमान किए।
घिरने गिरने के तरल रहस्यों का सहसा अवसान हुआ दाएँ बाएँ से उठी पवन उठते पौधों का मान हुआ।
आने लग गई धरा पर भी मौसमी हवा छवि प्यारी की यादों में लौट रही निधियाँ मनमोहन कुंज विहारी की।
इति

Paired Painting
Krishna and Radha in a Monsoon Landscape
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Varsha Ne Aaj Vidai Li carries.