
गीत का जन्म
Geet Ka Janm
Dushyant Kumar
2 verses · ~12 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
कौन यहाँ आया था कौन दिया बाल गया सूनी घर-देहरी में ज्योति-सी उजाल गया
पूजा की बेदी पर गंगाजल भरा कलश रक्खा था, पर झुक कर कोई कौतुहलवश बच्चों की तरह हाथ डाल कर खंगाल गया
आँखों में तिरा आया सारा आकाश सहज नए रंग रँगा थका- हारा आकाश सहज पूरा अस्तित्व एक गेंद-सा उछाल गया
अधरों में राग, आग अनमनी दिशाओं में पार्श्व में, प्रसंगों में व्यक्ति में, विधाओं में साँस में, शिराओं में पारा-सा ढाल गया|
इति

Paired Painting
Gangavatarana
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kaun Yaha Aaya Tha carries.