
बहुत कुछ है अभी
Bahut Kuch Hai Abhi
Divik Ramesh
7 verses · ~24 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

7 verses · ~1 min
(एक)
कहाँ है जीवनदायिनी वह कूची चितेरे की
श्लोकों के मौन संगीत में देखो तो लौट रहीं टहनियाँ हरी हरी
लौट रहा काफिला ठूँठों का वृक्षों की राह पर
कहाँ है जीवनदायिनी वह कूची जिसके रंग का चमत्कार है यह जीवन ठूँठों में लौटता
(दो)
वही तना टहनियाँ वही खड़ा भी निकलकर पृथ्वी से ही पर रहा तो ठूँठ ही वृक्ष था जो कभी। बस रंग ही तो नहीं भरा चितेरे ने हरा आकृति और जीवन का रहस्य खुल गया।
इति

Paired Painting
Summer Landscape
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Jeevan carries.