
रूबरू तुम हुए किन्तु जाना नहीं
Rubaru Tum Hue Kintu Jana Nahi
5 verses · ~8 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

5 verses · ~1 min
मैं माध्यम हूँ, मौलिक विचार नहीं, कनफ़्युशियस ने कहा ।
तो मौलिक विचार कहाँ मिलते हैं, खिले हुए फूल ही नए वृन्तों पर दुबारा खिलते हैं ।
आकाश पूरी तरह छाना जा चुका है, जो कुछ जानने योग्य था, पहले ही जाना जा चुका है ।
जिन प्रश्नों के उत्तर पहले नहीं मिले, उनका मिलना आज भी मुहाल है ।
चिंतकों का यह हाल है कि वे पुराने प्रश्नों को नए ढंग से सजाते हैं और उन्हें ही उत्तर समझकर भीतर से फूल जाते हैं । मगर यह उत्तर नहीं, प्रश्नों का हाहाकार है । जो सत्य पहले अगोचर था, वह आज भी तर्कों के पार है ।
इति

Paired Painting
Woman in Blue Sari
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Madhyam carries.