
अंधियार ढल कर ही रहेगा
Andhiyar Dhal Kar Hi Rahega
Gopaldas 'Neeraj'
6 verses · ~32 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

5 verses · ~1 min
इस तरह छाया क्षितिज पर था अन्धेरा शाम का ही रूप धर बैठा सवेरा इसलिए अब हम हृदय-दीपक जलाने आ गए हैं आज हम उजियार का उत्सव मनाने आ गए हैं ।
एक दीपक बन स्वयं हम स्नेह जीवन में भरेंगे और जिनके मन अन्धेरों से घिरे हैं आज अन्तर-ज्योति से उनके भरेंगे
पर किरण का बिम्ब दीखे हर दिशा में हम उसे दर्पण दिखाने आ गए हैं ।
रह न जाए अब कहीं भी रात काली इसलिए यह ज्योति अन्तस् में जला ली चिह्न भी मिलने न पाए अब तिमिर का इस तरह से हम मनाएँगे दिवाली
न्याय-समता-प्रेम के दीपक जलेंगे हम विषमता को मिटाने आ गए हैं ।
इति

Paired Painting
Sita Swayamvar
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Deepak Jalane Aa Gaye Hain carries.