सिसकते आब में किस की सदा है
Sisakte Aab Mein Kis Ki Sada Hai
Bashir Badr
7 verses · ~10 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Khuda Hum Ko Aisi Khudai Na De
Bashir Badr9 verses · ~1 min
ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे
ख़तावार समझेगी दुनिया तुझे अब इतनी भी ज़्यादा सफ़ाई न दे
हँसो आज इतना कि इस शोर में सदा सिसकियों की सुनाई न दे
अभी तो बदन में लहू है बहुत कलम छीन ले रोशनाई न दे
मुझे अपनी चादर से यूँ ढाँप लो ज़मीं आसमाँ कुछ दिखाई न दे
ग़ुलामी को बरकत समझने लगें असीरों को ऐसी रिहाई न दे
मुझे ऐसी जन्नत नहीं चाहिए जहाँ से मदीना दिखाई न दे
मैं अश्कों से नाम-ए-मुहम्मद लिखूँ क़लम छीन ले रोशनाई न दे
ख़ुदा ऐसे इरफ़ान का नाम है रहे सामने और दिखाई न दे
इति

Paired Painting
Bheeshma's Oath
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Khuda Hum Ko Aisi Khudai Na De carries.