
11 verses · ~4 min
मेरी नज़रों ने वायदा किया है मेरी रूह से कि सनम तेरे सिवा कुछ ना देखेंगी तू ये जानता है ना कि मेरी रूह तू है?
मैं शायद खुदा की बनायी पहली और अकेली औरत हूँ जो अपने जिस्म के टुकड़े से ज्यादा प्यार अपने आदमी से करती है क्योंकि जिस्म के सब टुकड़े भी तो तूने दिए हैं क्योंकि मेरी जिन्दगी की ये पवित्र खुशी भी तो तूने दी है क्योंकि इस मन को बेइंतहा सहारा भी तो तूने दिया है क्योंकि मुझ नाचीज़ को आसमान पर उड़ना भी तो तूने सिखाया है.
तू इतना जान ले हमदम की तेरे बिना मैं कुछ भी नहीं कि मेरी ख़ुशी मेरी जिन्दगी तू है कि तेरे बिना जिन्दगी जिन्दगी ही नहीं मेरी रूह ने वादा किया है मेरे खुदा से कि सनम अगर तुझसे हुई जुदा तो तड़प के मर जायेगी रूहों का सफ़र कभी फनां नहीं होता, पर मेरी रूह तेरे बिना ना जी पायेगी...
बहुत डरती हूँ की कभी इस हालत पर ना पहुंचूँ कि तुझसे चाहूँ तो बात ना कर सकूँ. चाहूँ तो तुझे देख ना सकूँ. तेरी पुरसुकूँन आवाज का मीठा अमृत अपने दिलो दिमाग में ना महसूस कर सकूँ. ऐसा तो हो नहीं सकता, सिवाय तब की जब तू मुझसे जुदा हो गया हो और मौत के अंधेरों में खो गया हो क्योंकि ये तो हो नहीं सकता कि जीते जी तू मुझसे रूठ गया हो.
मेरे होते तू मर नहीं सकता क्योंकि मेरी जिन्दगी तू है, गर मै हूँ जिन्दा तो फिर तू भी यहीं कहीं है.
मेरी हंसी खुशी सब तू ही है मेरी जान...मै जीना चाहती हूँ, हँसना चाहती हूँ क्या मेरी खातिर रहेगा तू हमेशाँ जिन्दा? क्या मेरी खातिर रहेगा तू हमेशाँ मेरा दिलबर? क्या मेरी खातिर रहेगा यही तेरे ख्यालों का असर?
दिल चाहता है कि खुदा से और तुझसे एक वादा ले लूं.. कि देखेंगी मेरी आँखें तुझे ही जब तक मेरी आँखों में देखने की हिम्मत है कि सुनूँगी तेरी आवाज़ जब तक जिंदा हूँ कि तेरी गैर मौजूदगी का एहसास ना हो कि कभी मजबूर ना होऊँ तेरी दूरी से कि सोऊँ जब चिरनिद्रा में तो रूह में, आँखों में समा कर तुझे... कि जाऊं मैं तुझे छोड़ कर, ना कि तू मुझे. तुझसे जुदा मैं कभी हो नहीं सकती, बस मेरी मौत है तेरी दूरी मेरे लिये..
तू ना होगा तो किस को इस पागलपन से चाहूंगी? तू ना होगा तो किस से इस पागलपन से लडूंगी? तू ना होगा तो किस से इस पागलपन से प्यार कर सकूंगी? तू ना होगा तो कौन दिखायेगा मुझे इस धरती पर स्वर्ग? तू ना हो तो कौन मुझे पलकों पर बिठाएगा? तू ना होगा तो कौन मुझे जिन्दा रखेगा?
तू रह जिन्दा सनम ताकि मैं जी सकूँ तू रह शादाब ताकि मैं हंस सकूँ तू रह ताकि मेरी आस पास तेरे वजूद की खुशबू रहे तू रह इस दुनिया में ताकि ये दुनिया रहने के काबिल रहे तू चल ताकि तेरे साए की छावं में, मैं शांती से सफ़र कर सकूँ तू रह आबाद ताकि मैं बस सकूँ बस तू ही तू है, इस जिन्दगी में, रूह में, सफ़र में, तू रह मेरी आस पास ताकि मैं हँसते हँसते मर सकूँ.
बहुत खुश हूँ मैं कि जिन्दगी ने मुझे अधूरा नहीं लौटाया एहसान है तेरा की मुझे प्यार में जीना आया कद्रदान हूँ तेरी कि अपनी कोख में तुझे समाया शुक्रगुज़ार हूँ तेरी कि खुदा की जांनिब तुझे पाया दौलतवार हूँ कि तेरी छाहँ का आशियाँ पाया.
मेरे प्यारे, परम पिता के बनाये आदमी, तू इतना प्यारा क्यों है? तू इतना दिल को समझने वाला हमसाया क्यों है? तेरे जनमदाता में जरूर कुछ होगा कि तू एक चीज़ है कभी सोचती हूँ... उस वृक्ष को भी चाहती हूँ मैं जिसका तू बीज है.
इति
The Poet
अंजना भट्ट
Anjana Bhatt
1953 · 1990s
Anjana Bhatt is a compelling voice in contemporary Hindi poetry who writes with profound emotional vulnerability. Born in 1957 in New Delhi, her work primarily navigates the intricate architecture of human relationships, domestic life, and the quiet sacrifices inherent in motherhood. She does not rely on complex literary structures. Instead, she brings the raw realities of everyday existence to the forefront of her verses. Poems like Bolo Maa and Dulhan Ka Singaar resonate deeply with readers because they articulate the unspoken fears and longings of the ordinary woman. She has cultivated a dedicated following through prominent literary platforms and literary journals, ensuring that the female experience is documented with empathy and clarity. Bhatt stands as a poet of genuine resilience, offering comfort and recognition to those who often feel overlooked by mainstream literary narratives.

Paired Painting
Savitri Pleading with Yama for the Life of Satyavan
This heartrending scene captures the pinnacle of devotion, as Savitri confronts Yama, the Lord of Death, to reclaim the spirit of her beloved Satyavan. With unparalleled courage, she kneels upon the forest floor, her hand raised in a gesture that is both a plea and a barrier against the encroaching shadow. Raja Ravi Varma masterfully portrays the ethereal, haunting presence of Yama, contrasting the vibrant, earthly life of Savitri with the silent, inevitable coldness of mortality. It is a testament to the power of love, illustrating the ancient Vedic tale where faith proves strong enough to challenge destiny itself.
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