№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Radha Krishna

Shringara

ज़रूरत

Zaroorat

Ajit Kumar
1 min read 7 versesज़रूरततितलीफूल

7 verses · ~1 min

मेरे साथ जुड़ी हैं कुछ मेरी ज़रूरतें उनमें एक तुम हो।

चाहूँ या न चाहूँ: जब ज़रूरत हो तुम, तो तुम हो मुझ में और पूरे अन्त तक रहोगी।

इससे यह सिद्ध कहाँ होता कि मैं भी तुम्हारे लिए उसी तरह ज़रूरी।

देखो न! आदमी को हवा चाहिए ज़िन्दा रहने को पर हवा तो आदमी की अपेक्षा नहीं करती, वह अपने आप जीवित है।

डाली पर खिला था एक फूल, छुआ तितली ने, रस लेकर उड़ गई। पर फूल वह तितली मय हो चुका था।

झरी पँखुरी एक: तितली। फिर दूसरी भी: तितली। फिर सबकी सब: तितली। छूँछें वृन्त पर बाक़ी बची ख़ुश्की जो: तितली।

कोमलता अंतिम क्षण तक यह बताकर ही गई: 'मैं वहाँ भी हूँ, जहाँ मेरी कोई ज़रूरत नहीं।'

इति

Ajit Kumar

The Poet

अजित कुमार

Ajit Kumar

Radha Krishna

Paired Painting

Radha Krishna

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Zaroorat carries.