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शहर के बीचोबीच जो एक बड़ा-सा फ़व्वारा है जिसके इर्द-गिर्द खूबसूरत बाग़ीचा है वहाँ-वहाँ बिछी हैं आरामदेह बेंचें
आराम भी करो नज़ारा भी देखो- संगीत की लय पर आर्केस्ट्रा के संग उछलती-कूदती रंगीन रोशनियाँ शीतल जल की फुहारें
इंद्रजाल में सबके सब मुग्ध-मोहित से फँसे थे
तभी सरपत के वन में पिंडली तक लथ-पथ कीचड़ से कास के फूल चुनता एक नन्हा शैतान खिलखिलाता नज़र आया।
इति

Paired Painting
Benares
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