№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Nair Lady Adorning Her Hair

Shanta

फूल और काँटा

Phool Aur Kanta

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'
1 min read 5 versesफूलflowerकाँटा

5 verses · ~1 min

हैं जन्म लेते जगह में एक ही, एक ही पौधा उन्हें है पालता रात में उन पर चमकता चाँद भी, एक ही सी चाँदनी है डालता।

मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवाएँ हैं बही पर सदा ही यह दिखाता है हमें, ढंग उनके एक से होते नहीं।

छेदकर काँटा किसी की उंगलियाँ, फाड़ देता है किसी का वर वसन प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर, भँवर का है भेद देता श्याम तन।

फूल लेकर तितलियों को गोद में भँवर को अपना अनूठा रस पिला, निज सुगन्धों और निराले ढंग से है सदा देता कली का जी खिला।

है खटकता एक सबकी आँख में दूसरा है सोहता सुर शीश पर, किस तरह कुल की बड़ाई काम दे जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।

इति

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

The Poet

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

Nair Lady Adorning Her Hair

Paired Painting

Nair Lady Adorning Her Hair

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Phool Aur Kanta carries.