
अब आए न मोरे सांवरिया
Ab Aae Na More Sanwariya
Amir Khusrow
1 verse · ~6 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~2 min
श्याम रंग में तो न रँगे हो जो अन्तर रखते हो श्याम। तो जलधार हो नहीं विरह-दव में जो जल जल जीवें बाम। जीवनप्रद हो तभी करो जो तुम चातक को जीवन दान। कैसे सरस कहें हम तुमको ऊसर हुआ न जो रसवान।1|
कैसे हो परजन्य, वियोगी जन को जो हो दुखद वियोग। पयद न हो जो दल जवास का पला न कर उसका उपयोग। बने पयोधार पर न सके कर पय प्रेमिक-मराल प्रतिपाल। बिलसित रहे बहन कर उर पर आप बलाका मंजुल माल।2|
बहुधा करते हो बसुधा का बिपुल उपल द्वारा अपकार। इसीलिए कर घोर नाद हो सहते दामिनि-कशा-प्रहार। उमड़ उमड़ बर बारिबाह बन हो भर देते सरि सर ताल। रहता है प्यासे पपीहरा को कतिपय बूँदों का काल।3|
अशनि-पात-प्रिय, अधार-विलंबी, करक-निकेतन, दानव-देह। हो तुम मशक-दंश-अवलम्बन तुम्हें कुटिल अहिका है नेह। रहे भरे ही को जो भरते बरस बारि-निधि में बसु याम। तो नभतल में घरी घरी घिर रहे घूमते क्या घनश्याम।4|
इति
The Poet
Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

Paired Painting
The Banished Yaksha
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ghanshyam carries.