№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
The Banished Yaksha

Shringara

घनश्याम

Ghanshyam

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'
2 min read 4 versesघनश्यामdark cloudविरह

4 verses · ~2 min

श्याम रंग में तो न रँगे हो जो अन्तर रखते हो श्याम। तो जलधार हो नहीं विरह-दव में जो जल जल जीवें बाम। जीवनप्रद हो तभी करो जो तुम चातक को जीवन दान। कैसे सरस कहें हम तुमको ऊसर हुआ न जो रसवान।1|

कैसे हो परजन्य, वियोगी जन को जो हो दुखद वियोग। पयद न हो जो दल जवास का पला न कर उसका उपयोग। बने पयोधार पर न सके कर पय प्रेमिक-मराल प्रतिपाल। बिलसित रहे बहन कर उर पर आप बलाका मंजुल माल।2|

बहुधा करते हो बसुधा का बिपुल उपल द्वारा अपकार। इसीलिए कर घोर नाद हो सहते दामिनि-कशा-प्रहार। उमड़ उमड़ बर बारिबाह बन हो भर देते सरि सर ताल। रहता है प्यासे पपीहरा को कतिपय बूँदों का काल।3|

अशनि-पात-प्रिय, अधार-विलंबी, करक-निकेतन, दानव-देह। हो तुम मशक-दंश-अवलम्बन तुम्हें कुटिल अहिका है नेह। रहे भरे ही को जो भरते बरस बारि-निधि में बसु याम। तो नभतल में घरी घरी घिर रहे घूमते क्या घनश्याम।4|

इति

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

The Poet

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

The Banished Yaksha

Paired Painting

The Banished Yaksha

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ghanshyam carries.